Shabd jo kabhi sunai na diye

आँखों की नमी को ख़ुशी के आंसू बताना , कहना सब कुछ ठीक है फिर थोडा मुस्कुराना , भले दिल में हो दर्द पर हमदर्द बन जाना , देखा, कितना आसान है किसी भी गम को छुपाना ||

Showing posts with label samay. Show all posts
Showing posts with label samay. Show all posts

Wednesday, February 16, 2011

Samay

जिंदगी  का  एक  दिन और ढल गया
वर्तमान से वही अतीत में बदल गया |
लगता    है  जैसे  कोई   पूछ   रहा   हो 
कितना समय और व्यर्थ निकल गया??

समय  निकला  है  और निकल जायेगा 
पर   सवाल   का  जबाब  नहीं आयेगा |
क्योंकि गंवाया है व्यर्थ में कितना समय??
गिनेगे तो समय और व्यर्थ निकल जायेगा||

बचने   को   समय   खुद   बदलना  पड़ेगा
उचाईयों  को  पाना  है  तो  जलना पड़ेगा |
क्योंकि समय तो गतिमान है रुकता नहीं
यदि  पाना  है  मंजिल  तो चलना पड़ेगा ||

पर चलते है कई लोग मंजिल नहीं पाते
होकर  के  पथ  भ्रष्ट भटकते रह  जाते |
क्योंकि  राह  दिखने  वाले  तो  बहुत है 
पर छोड़कर मझधार वे आगे नहीं आते||

चलना  है  अकेले  यदि  पाना  है   मंजिल
मिलेंगी रास्ते भर कठिनाइयों की महफ़िल|
जब  तक   है   दम   आशा    ना   छोड़ना 
पा  जाओगे   मंजिल   होगे  यदि  काबिल||

Sunday, February 13, 2011

Atma Sambodhan


समय   नहीं  रुकता  पल को
क्यों व्यर्थ  इसे  तू खोता है |
जब पास में  था तो सोता था
अब बीत   गया  तो रोता है ||

पर नहीं  लौटकर  आता जब 
क्यों मातम  व्यर्थ मनाता है |
होकर  निराश  क्यों  जीवन से
पल नित नए व्यर्थ गंवाता है ||

क्यों  नहीं  जगता   निद्रा   से 
जब  नया  सवेरा  आता  है  |
यह   आशाओं  का  नवल सूर्य
जब तुझको राह  दिखाता है  ||


अब जाग तोड़कर स्वप्न चक्र
युद्ध   स्थल   तुझे बुलाता है |
यह  कार्य क्षेत्र  की  रणभूमि
क्यों   इससे  तू  घबराता है ||

अब चौंक नहीं यह देख चमक
तलवार   जिसे   तू उठाता है |
मेहनत  का  है  यही   खड्ग 
जो तुझको विजय दिलाता है ||


अब   शत्रु   दल  तेरे    आगे 
इसे दलन तुही कर सकता है |
बाधाओं     रुपी    यह    शत्रु 
तेरी राह नहीं ढक सकता है||

मत रुकना   जीवन मैं तब  तक
जब तक  ह्रदय नहीं रुक जाता |
लड़ते रहना    अब उस पल तक
जब तक तू विजय   नहीं पता ||