Mere Mann Ki Baat
मेरी कविता ही मेरे मन का प्रतिबिम्ब है, कोशिश रहेगी की यह मेरी पहचान बन सके
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Shabd jo kabhi sunai na diye
आँखों की नमी को ख़ुशी के आंसू बताना ,
कहना सब कुछ ठीक है फिर थोडा मुस्कुराना ,
भले दिल में हो दर्द पर हमदर्द बन जाना ,
देखा,
कितना आसान है किसी भी गम को छुपाना
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Monday, December 5, 2011
मंजिल
मंजिल बनाया रास्तों को , और फिर देखा असर |
ध्येय हर दम साथ है पर , है अभी बाकी सफर ||
Saturday, November 26, 2011
मौत
ढलता है दिन, सुबह से शाम होती है |
बेबफा जान है, मौत बदनाम होती है ||
Sunday, November 13, 2011
गुमराह
कर नहीं सकता कोई गुमराह राहों को मगर |
गुमराह होते राह में फिरते मुसाफिर हैं कई||
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