Shabd jo kabhi sunai na diye

आँखों की नमी को ख़ुशी के आंसू बताना , कहना सब कुछ ठीक है फिर थोडा मुस्कुराना , भले दिल में हो दर्द पर हमदर्द बन जाना , देखा, कितना आसान है किसी भी गम को छुपाना ||

Monday, October 15, 2012

इनकार का कारण

इनकार  का कारण 

चलो  स्वीकार करता हूँ 
हाँ मुझको प्यार है उससे ।।
मगर इजहार करने  से ।
अभी इनकार है मुझको ।।

करे जो प्यार  दुनिया में,
सुना है दर्द पाता है ।।
कहो ये दर्द कैसे दूँ ,
जिसे मैं प्यार करता हूँ ।।

Tuesday, April 3, 2012

शिकायत लोग करते हैं


जिन्हें वे दूर जाने को,
स्वयं मजबूर करते हैं | 
उन्ही के याद आने की,
 शिकायत लोग करते हैं ||

है दूरी प्यार का कारण,
बताया लोग करते हैं |
उन्ही के पास आने पर,
शिकायत लोग करते हैं ||

उम्र भर प्यार सच्चे की,
परीक्षा लोग करते हैं |
उन्ही के रूठ जाने पर,
 शिकायत लोग करते हैं ||

प्रेम के गीत है गाते,
 प्रेम को ब्रम्ह कहते हैं |
किन्ही के प्रेम करने पर,
 शिकायत लोग करते हैं ||


स्वयं देते दगा सबको,
दिखावा रोज करते है |
पर भरोसा तोड़ जाने की,
शिकायत लोग करते हैं ||

सभी खुशियाँ ज़माने की,
इकट्ठी कर नहीं पाते |
उमर के बीत जाने की,
 शिकायत लोग करते हैं ||

समर्पण को स्वयं से ही,
वे कोशों दूर रखते हैं |
किस्मत में न होने की,
शिकायत लोग करते है ||

स्वयं की खामियां अक्सर,
छिपाया लोग करते हैं |
मगर मजबूर होने की,
शिकायत लोग करते हैं ||

वे अपने सोचने के ढंग को,
 नया आकार देते हैं |
सभी के बदल जाने की,
शिकायत लोग करते हैं ||

खुशी के बाँट देने से,
कमी आती नहीं उसमे |
पर किसी के मुस्कुराने की,
शिकायत लोग करते हैं ||

अमित जैन
2/4/2012

Saturday, March 3, 2012

बेहाल

क्या कहे किस्मत मेरी क्या कर रही कमाल है ।

अब वे नहीं रखते खबर जिनके लिए बेहाल हैं ।।

Monday, February 27, 2012

Behaal

क्या कहे किस्मत मेरी क्या कर रही कमाल  है ।

वे पूछते है हाल ऐ दिल जिसने किया बेहाल है ।।

Wednesday, February 22, 2012

समझ

मैं निरा मूरख समझ अल्फाज की मुझमे नहीं |

क्या समझ वह पाउँगा जिसकी कोई भाषा नहीं ||

Saturday, February 18, 2012

चाहत

जो मिले चलकर सतत वह मील का पत्थर रहे |

मैं चाहता हूँ जिंदगी भर रास्ते न हों खतम ||

Sunday, February 12, 2012

ग़लतफ़हमी

शब्द मुखरित ना हुए, फिर शोर ये कैसा हुआ |

आग बिन प्राचीर पर , है उठ रहा कैसा धुआं ||

खोदते हैं आज सब क्यों ग़लतफ़हमी का कुआँ |

और क्यों कहते सम्हल तू , प्रेम का रोगी हुआ ||

Sunday, December 11, 2011

हमसफ़र

रास्तें सब एक हों , और मंजिलें भी एक हों |

है न कोई हमसफ़र, जिसके इरादे नेक हो ||

साथ में था कौन आया , साथ में जो जायेगा |

आएगा जब मोड़ कोई, भेद सब खुल जायेगा ||

Monday, December 5, 2011

मंजिल

मंजिल बनाया रास्तों को , और फिर देखा असर |

ध्येय  हर दम साथ है पर , है अभी बाकी सफर  ||

Saturday, November 26, 2011

मौत

ढलता है दिन, सुबह से शाम होती है |


बेबफा जान है, मौत बदनाम होती है ||